सुप्रीम कोर्ट में शराब की पैकेजिंग को लेकर दायर एक अहम जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों के आबकारी विभागों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया। मामला ऐसी पैकेजिंग में शराब बेचने का है जो देखने में आम फ्रूट जूस जैसी लगती है।
यह याचिका संस्था ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग (CADD)’ ने दायर की है। संस्था का कहना है कि टेट्रा पैक, PET बोतलों और सैशे जैसी पैकेजिंग में शराब बेची जा रही है जो दिखने में बिल्कुल जूस के पैकेट जैसी होती है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस तरह की पैकेजिंग से नाबालिगों के शराब तक आसानी से पहुंचने, शराब पीकर गाड़ी चलाने और सार्वजनिक जगहों पर शराब सेवन के मामलों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ जाता है।
क्या दी दलील?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विपिन नायर ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी कि इन पैकों पर तंबाकू उत्पादों की तरह कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि ये पैक बाहर से फ्रूट जूस जैसे लगते हैं लेकिन अंदर वोडका होती है। इन पर सेब, आम जैसे फलों की तस्वीरें छपी होती हैं जिससे उपभोक्ता, खासकर नाबालिग, भ्रमित हो सकते हैं।
सीजेआई ने की क्या मौखिल टिप्पणी?
वकील की इस दलील पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बहुत भ्रामक है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी पैकेजिंग आम लोगों, विशेष रूप से नाबालिगों को गुमराह कर सकती है और इससे गंभीर सामाजिक और कानूनी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
याचिका में मांग की गई है कि केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया जाए कि वे ऐसी ‘छिपी हुई पैकेजिंग’ में शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक समान नीति बनाएं। साथ ही आबकारी कानूनों में आवश्यक बदलाव कर यह सुनिश्चित किया जाए कि शराब उत्पादों की पैकेजिंग स्पष्ट, पारदर्शी और उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक न हो।
Picture Source :

